zindagi

The waves lashing away

जिंदगी बस ऐक हवा का झोका है
कब आता है…कब जाता है
पता भी नहीं चलता
बस युही गुज़र जाता है
एक हल्का सा अहसास छोड़ जाता है…
जिंदगी के हर मोड़ पर
कोई मिलता है कोई बिछडता है
मिलने में और बिछड़ने में
जिंदगी गुज़र जाती है
मिलना और बिछड़ना शरीर का है
क्योंकि दिल तो अक्सर जुड़ जाते है
और ऐक अहसास छोड़ जाते हैं…
जिंदगी कोरा कागज़ है
उसमे मन चाहे रंग भर लो
कुछ रंग मिटा दो… मिट जाते है
पर कुछ रंग गहरे उतर जाते है
और एक अहसास छोड़ जाते है…
ज़िन्दगी जैसे खाली पन्ना हो
श्याही से एक कहानी लिख डालो
उस कहानी के पात्र बनकर जीयो
कहानी आखिर ख़तम होजाती है
पर कोई किरदार खूब निभाता है
और एक अहसास छोड़ जाता है…
ज़िन्दगी बहती नदी का पानी है
उसमे डुबकी लगाकर देखो
वही पानी फिरसे छूना नहीं होता
बहती रहती धारा ऐसी…कि पानी नहीं ठहरता
ठहरना तो हमको है
इसका अहसास छोड़ जाती है…
ज़िन्दगी के अनगिनत पल में
कुछ मीठे कुछ कडवे पल आते है
हर पल गुज़र जाता है
खुश रहना या दुखी
यह हमपर निर्भर रहता है
लेकिन पल पल की इस धड़कन भी
एक अहसास छोड़ जाती है…
ज़िन्दगी जो भी है…जैसी भी है…
इसे समझना बहुत मुश्किल है
न जान सकते हैं हम
न सुलझा सकते है हम
ऐसी उलझी एक सुन्दर सी पहेली है
लेकिन ज़िन्दगी के इस रंगीन उलझन मे
कोई आकर…कुछ करकर…दिल छूकर…
एक अहसास छोड़ जाता है…❤
written:
Naina Nair
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2 thoughts on “zindagi

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